द फॉलोअप डेस्क
अगर आप सोचते हैं कि अंग्रेजी ही एक ऐसी भाषा से जिससे दुनिया में लोगों से बात कर सकते हैं तो आप यहां पर थोड़े से गलत हो सकते हैं। क्योंकि अंग्रेजी के अलावा भी एक ऐसी भाषा जो इस दौर में सबको समझ आती है। वह है इमोजी वाली भाषा। जी हां, अगर आपकों किसी को प्यार दिखाना है तो दिल वाली इमोजी, गुस्सा दिखाना है तो गुस्से वाली इमोजी, हसना है तो हसने वाली इमोजी।
इमोजी किसी की अपनी भाषा नहीं ये सबकी भाषा है। भाषा विवादों से भरे दौर में, जहां हमारे देश में 'हिंदी versus अंग्रेजी', 'स्थानीय versus राष्ट्र भाषा' जैसे मुद्दे हमेशा सुर्खियों में रहते हैं, वहीं इमोजी ने बिना शोर-शराबे के, बिना किसी विवाद के, संवाद की एक साझा भाषा बना दी है। आज, 17 जुलाई को विश्व इमोजी दिवस मनाया जाता है। वह भी इसलिए, क्योंकि कैलेंडर इमोजी पर दिखने वाली यही तारीख दुनियाभर के स्मार्टफोन्स में दर्ज है।
इमोजी न तो कोई ग्रामर मांगती है, न ही उच्चारण की शुद्धता। बस एक दिल, एक स्माइली या एक थम्स अप भेजिए और सामने वाला समझ जाता है कि आप क्या कहना चाहते हैं। डिजिटल वर्ल्ड में इमोजी वह माध्यम बन गई है, जो किसी भी भाषा के बंधन से आजाद है। व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक या एक्स हर जगह लोग शब्दों से ज्यादा इमोजी में अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। तारीफ करनी हो तो आग वाली इमोजी, या किसी बात पर सहमति जतानी हो तो अंगूठे वाली इमोजी। बस, इमोजी भेजिए बिना कोई शब्द लिखे, आपके दिल की बात कह देगा।
भारत, जहां 22 आधिकारिक भाषाएं और 19,500 बोलियां हैं, यहां हर 100 किलोमीटर पर भाषा और लहजा बदल जाता है। ऐसे में इमोजी एक ऐसी साझा डिजिटल लिपि बन गई है, जिसे हिंदीभाषी से लेकर तमिलभाषी, बंगाली से लेकर मराठी तक हर कोई समझता है। यह भाषा की राजनीति से ऊपर एक ऐसी यूनिवर्सल लैंग्वेज है, जो दिलों को जोड़ती है। अगर आप डेटा पर नजर डालेंगे तो दुनिया भर में 92% लोग इमोजी का इस्तेमाल करते हैं। 65% कर्मचारी टेक्स्ट के साथ इमोजी का उपयोग करते हैं। 88% जेन जी कर्मचारी इमोजी को ऑफिस कम्युनिकेशन में उपयोगी मानते हैं। 49% जेन एक्स और बेबी बूमर भी अब इमोजी को उपयोगी मानने लगे हैं। वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स के दौर में इमोजी ने बिजनेस कम्युनिकेशन में भी अपनी अहमियत बना ली है। एडोब के सर्वे के मुताबिक 2019 में जहां 72% लोग ऑफिस में इमोजी भेजने से हिचकते थे, वहीं 2025 में 93% लोग इसे आम बात मानते हैं।
1980 में अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक स्कॉट फालमैन ने पहली बार इमोटिकॉन का सुझाव दिया था। फिर 1999 में जापानी डिजाइनर शिगेटाका कुरिटा ने मोबाइल कंपनी के लिए पहली इमोजी सीरीज बनाई। 2007 में गूगल ने यूनिकोड कंसोर्टियम से इसे मान्यता देने की अपील की। फिर 2011 में Apple ने अपने iOS में इमोजी कीबोर्ड जोड़ दिया और फिर इमोजी ग्लोबल हो गए। आज, इमोजी हर स्मार्टफोन का हिस्सा हैं और भाषा की दीवारें तोड़ने वाला सबसे ताकतवर डिजिटल टूल बन चुके हैं।
